सोरसन में जानवरों को नहीं मिल रहा पानी, टूरिस्ट भी यहां नहीं हैं सेफ

सोरसन में जानवरों को नहीं मिल रहा पानी, टूरिस्ट भी यहां नहीं हैं सेफ

सोरसन में जानवरों को नहीं मिल रहा पानी, टूरिस्ट भी यहां नहीं हैं सेफ

सोरसन के प्रति सरकारी उदासीनता का आलम यह है कि यहां पर वन्य जीवों के साथ साथ यहां आने वाला आमजन तक सुरक्षित नहीं है। टेक्नोलॉजी तो दूर वन्य जीवों के लिए पानी और खाने की व्यवस्था तक नहीं है। यह सार निकलकर कर सामने आया है कोटा यूनिवर्सिटी की एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. अनुकृति शर्मा के रिसर्च पेपर में। पेपर का विषय टेक्नोलॉजी एडॉप्टेशन फोर मार्केटिंग एंड कंजर्वेशन है। यह पेपर एडवांसेज इन हॉस्पिटेलिटी एंड टूरिज्म-निर्जन स्थान में वन्य जीव में प्रकाशित हुआ है।
पेपर में क्या है जानकारी
इसी पेपर में बांग्लादेश के रिसर्चर ने भी बांग्लादेश में वाइल्ड लाइफ में कंजर्वेशन और टेक्नोलॉजी के उपयोग किए जाने के तथ्यों को शामिल किया है। इसमें बताया गया है कि सुंदर वन में किसी प्रकार टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा रहा है। पेपर में बताया गया है कि किस प्रकार सोरसन को बदहाली से निकालकर टेक्नोलॉजी से जोड़ यहां पर वाइल्ड लाइफ टूरिज्म को विकसित किया जा सकता है।
मार्केटिंग स्ट्रेटेजी की कमी
सोरसन की विजिट के दौरान डॉॅ. शर्मा ने पाया कि सोरसन में पाने जाने वाले ब्लैकबर्ग आसानी से पर्यटकों को आकर्षित कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए अब तक प्रयास नहीं किए गए। प्रमोशन के लिए मार्केटिंग स्ट्रेटेजी नहीं अपनाई गई। यहां तक की इस जगह की एक वेबसाइट तक विकसित नहीं की है। सरकार और वाइल्ड लाइफ ट्यूर ऑपरेटर ने कोई कदम नहीं उठाते। यह जगह किसी भी ट्यूरिस्ट एक्टीविटी के लिए नहीं जानी जाती। इतनी संभावनाओं होने के बावजूद यहां पर वन्य जीवों के साथ आने जाने वालों के लिए पानी तक की व्यवस्था नहीं है। पर्यटकों के लिए इस जगह को सुरक्षित नहीं बताया गया है। सेंचुरी का दर्जा अब तक इस स्थान को नहीं मिल पाया। गर्मियों में हाल और भी बिगड़ जाते हैं। पानी नहीं होने के कारण ब्लैकबर्ग सड़कों पर आ जाते हैं।
इन सुझावों से बदल सकती है दशा और दिशा
डॉ. शर्मा के अनुसार रिसर्चर, बायोलॉजिस्ट और स्थानीय लोगों की मदद से टेक्नोलॉजी का विकास कर उसका उपयोग किया जा सकता। वन्य जीवों के वॉटर होल की बनाने के लिए पर्याप्त मात्रा में फंडिंग और देखरेख के लिए मैनपॉवर की जरूरत है। ब्लैकबर्ग की विशेषता को मूवी, पोस्टर और सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। साइन बोर्ड और होर्डिंग्स का उपयोग प्रचार के लिए किया जा सकता है। प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर इसके विकास में सहभागिता निभा सकते हैं। पास में स्थित अमलसारा को विकास करके पर्यटकों यहां लाया जा सकता है। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार साधन विकसित होंगे
सीसीएफ ने डीसीएफ से मांगी रिपोर्ट
सोरसन में काले हिरणों के लिए हो रहे जल संकट के मामले को लेकर सीसीएफ कोटा ने बारां डीसीएफ से रिपोर्ट मांगी है। इस संबंध में सीसीएफ इंद्रराजसिंह ने भास्कर में प्रकाशित समाचार पत्र के आधार पर इस एरिया में काले हिरणों के लिए गर्मी के सीजन में पानी की संबंध में जानकारी मांगी है। उल्लेखनीय है कि भास्कर ने इस संबंध में तीन मई को सोरसन में काले हिरणों के लिए जल संकट की स्थिति को लेकर प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें काले हिरणों का झुंड दौड़ते वाहनों के बीच सड़क पार करने से लेकर पानी की समस्या को बताया था। इसके बाद वनविभाग के अधिकारी का ध्यान इस ओर गया है।

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2 Comments

  1. Visitor Photo
    By : Amritlal

    Job

  2. Visitor Photo
    By : Devesh

    Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai

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