सीएम वसुंधरा से टूटी उम्मीदें, जनरल वार्ड के 750 रु. कहां से लाकर दूं: रायधर

सीएम वसुंधरा से टूटी उम्मीदें, जनरल वार्ड के 750 रु. कहां से लाकर दूं: रायधर

सीएम वसुंधरा से टूटी उम्मीदें, जनरल वार्ड के 750 रु. कहां से लाकर दूं: रायधर

राज्य के अस्पतालों में दूसरे राज्यों के रोगियों के साथ “मराठी-बिहारी’ जैसा भेदभाव जारी है। गंभीर रूप से बीमार बेटे श्रीपाल सिंह (35) को इलाज के लिए कोटा के एमबीएस अस्पताल लाए अशोक नगर (एमपी) के सहोदरी गांव के रायधर सिंह यादव इस भेदभाव से भावुक हो गए। सोमवार को उन्होंने किसी से भास्कर का नंबर लेकर संपर्क किया। बोले-बहन वसुंधरा से ऐसी उम्मीद नहीं थी।
बीजेपी के सक्रिय कार्यक्रता
दरअसल रायधर भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता हैं। वे मप्र में राजमाता विजयराजे सिंधिया के चुनावों में खूब घूमते थे। तब वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और मामा ध्यानेंद्र के प्रचार में जाते थे। उनका दर्द है कि क्या कोई सरकारी अस्पताल के जनरल वार्ड में बेड का 750 रुपए लेता है!
सड़कों पर भटक रहे रायधर
अशोक नगर (एमपी) के सहोदरी गांव के रायधर सिंह यादव का पिछले 5 दिन से एक ही पता है-एमबीएस अस्पताल के मेन गेट के बाहर जूस का ठेला। यहीं उनके बेटे के इलाज के सारे दस्तावेज और सूटकेस पड़ा रहता है। रायधर ने बताया कि बेटे श्रीपाल की रीढ़ की हड्डी टूट चुकी, इसलिए मूत्रनली में प्रॉब्लम है। 5 दिन पहले उसे लेकर कोटा आए। यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के डॉक्टरों को दिखाया तो उन्होंने यूरोफ्लोमेट्री जांच की सलाह दी। इसकी डेट 25 फरवरी की मिली है।
750 रुपए रोजाना बेड चार्ज
बीमार बेटे को लेकर दोबारा गांव नहीं जा सकते थे, ऐसे में यहीं रुकना पड़ा। अस्पताल में भर्ती करने को कहा तो डॉक्टरों ने कहा कि 750 रुपए रोजाना बेड चार्ज लगेगा। इतने पैसे नहीं थे इसलिए बेटे को भर्ती नहीं करवाया। उनके गांव की बंजारा समाज की बेटी कोटा के निकट जगपुरा गांव में ब्याही है, बेटे को वहां भेज दिया और खुद सुबह से शाम तक अस्पताल के इर्दगिर्द घूमते रहते हैं। रायधर सांसद ओम बिरला से भी मिलने गए और सागर के सांसद से भी बात की, लेकिन कोई हल नहीं निकला।
प्राइवेट हॉस्पिटल से भी ज्यादा चार्ज
दिसंबर में सरकार ने दो साल पूरे होने पर भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना लांच की थी। इसके तहत खाद्य सुरक्षा व राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे में आ रहे परिवारों को एक साल में 30 हजार से 3 लाख रुपए तक के फ्री इलाज की सुविधा है। क्लेम की राशि अस्पतालों को मिलती है। साथ ही सरकार ने यह भी आदेश जारी कर दिया कि दूसरे राज्य के रोगियों से उसी दर से पैसा वसूला जाए, जिस दर से भामाशाह योजना के तहत बीमा कंपनी से क्लेम उठाया जा रहा है।
1500 रुपए रोजाना का प्रावधान
इसमें जनरल वार्ड के 750 रुपए व आईसीयू के 1500 रुपए रोजाना का प्रावधान है। ऑपरेशन और अन्य इलाज का चार्ज अलग है। यह राशि कोटा के सामान्य प्राइवेट हॉस्पिटल से भी ज्यादा है। ज्यादातर प्राइवेट हॉस्पिटलों में 700 रुपए रोजाना बेड चार्ज है, जबकि वहां सरकारी अस्पताल से कई गुना ज्यादा सुविधा होती है और कम से कम दो बार डॉक्टर विजिट करता है।

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2 Comments

  1. Visitor Photo
    By : Amritlal

    Job

  2. Visitor Photo
    By : Devesh

    Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai

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