श्रीनाथपुरम स्टेडियम के ताले खुलवाने की गुहार वाली चिट्ठी मिलने के बाद भास्कर टीम आकांक्षा के घर पहुंची तो इस बच्ची का दर्द समझ आया। वह बैडमिंटन प्लेयर बनना चाहती है, लेकिन शहर में जो प्ले कोर्ट हैं, वह घर से बहुत दूर हैं। साइकिल से अकेले कैसे पहुंचे?
आकांक्षा ने बताया कि ‘दूर से चमकता श्रीनाथपुरम स्टेडियम और उसके भीतर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा बैडमिंटन हॉल, देखने में काफी अच्छा लगता है, लेकिन जब बाहर लटका हुआ ताला देखती हूं तो मन बैठक जाता है।
मैं बैडमिंटन अच्छा खेलती हूं और लगातार प्रेक्टिस कर अपने खेल को आगे तक ले जाना चाहती हूं, लेकिन प्रेक्टिस के लिए जगह नहीं है। श्रीनाथपुरम स्टेडियम घर के पास है, वहां जा सकती हूं पर बिना उद्घाटन हुए उसमें हमें खेलने की परमिशन नहीं है। प्लीज इस स्टेडियम को चालू करवा दो।’ मूलरूप से झांसी के निकट छत्रपुर की रहने वाली आकांक्षा अपने भाई-बहनों की कोचिंग की खातिर मां के साथ कोटा आकर रहने लगी है, लेकिन यहां उसकी बैडमिंटन की प्रेक्टिस छूट गई। जिस स्कूल में वो पढ़ती है वहां भी बैडमिंटन कोर्ट नहीं है। घर के पास पार्क में खेलने जाते हैं तो वहां भी आपत्ति करते हैं। घर के बाहर सड़क पर ही कुछ देर खेल लेती हूं। पिछले दिनों जिला स्तर पर खेलने गई थी, लेकिन प्रेक्टिस के अभाव में सफलता नहीं मिल सकी।
ये सुविधाएं हैं इसमें- बैंडमिंटन वुडन कोर्ट, लॉन टेनिस कोर्ट, बास्केटबॉल कोर्ट, वॉलीबॉल कोर्ट, फुटबाल मैदान, आधुनिक जिम, 8 लेन का रेसिंग ट्रैक है।
- 15.85 करोड़ रु. लागत।
- 5.5 हैक्टेयर क्षेत्रफल में बना है।
- 08 माह पहले पूरा हुआ।
दो महीने में केवल बयान बदले, इरादा तो अब भी साफ नहीं
खेल और उद्घाटन दोनों बड़े
खेल और उद्घाटन दोनों ही बड़े हैं। खेलने से किसी ने रोका तो नहीं। वैसे इसका उद्घाटन सीएम को करना है, पहले मैं दिखवाता हूं कि स्टेडियम कंप्लीट हुआ या नहीं। उसे बाद ही कुछ कह पाऊंगा।
अब 19 फरवरी 2016 को कह रहे हैं
मैं निरीक्षण करूंगा, फिर तय करूंगा
स्टेडियम के उद्घाटन संबंध में मुख्यमंत्री से चर्चा हुई थी। लेकिन, मुझे बताया गया कि कुछ काम बाकी है। एक बार मैं इसका निरीक्षण करूंगा। जो थोड़ा काम बाकी था यदि वो पूरा हो गया होगा तो शीघ्र ही उद्घाटन कर इसे शुरू करवा दिया जाएगा।
22 दिसंबर 2015 को कहा था
जल्द करवाएंगे लोकार्पण
पहले मुख्यमंत्री से स्टेडियम का लोकार्पण करवाना चाहते थे, लेकिन कार्यक्रम तय नहीं हो पा रहा है। अब इस बारे में सांसद ओम बिरला से बात करके शीघ्र ही इसका लोकार्पण करवाया जाएगा, ताकि इसका लाभ लोगों को मिल सके।
अब 19 फरवरी 2016 को कह रहे हैं
मंत्री से बात की थी, जल्द शुरू करवाएंगे
स्टेडियम को शुरू करवाने के लिए स्वायत्त शासन मंत्री राजपाल से बात की थी। उन्होंने इस माह के अंत तक आने और उद्घाटन करने की बात कही है। एक बार प्रभारी मंत्री से और बात कर लेंगे ताकि शीघ्र ही इसे शुरू करवाया जाएगा।
भास्कर को लिखी गई चिट्ठी में आकांक्षा उपाध्याय ने कहा है कि मैं आपके समाचार पत्र के माध्यम से इस ओर ध्यान आकर्षित करना चाहती हूं कि श्रीनाथपुरम का स्टेडियम पिछले 8 माह से बनकर तैयार है, लेकिन पब्लिक के लिए खोला नहीं जा रहा है। मेरे परिजन मुझे बैडमिंटन खेलने के लिए दादाबाड़ी व नयापुरा भेजना अफोर्ड नहीं कर सकते हैं। बैडमिंटन का प्लेयर बनना मेरा एकमात्र सपना है। आशा करती हूं कि आप इस ओर ध्यान देंगे।
आकांक्षा ही नहीं उसकी सहेलियां भी हैं दुखी
आकांक्षा ने बताया कि वो अकेली नहीं है। इस क्षेत्र में उसकी दो और सहेलियां भी हैं जो बेडमिंटन खेलना चाहती हैं, लेकिन दूर जाने में उन्हें भी परेशानी है। आकांक्षा ने जो चिट्ठी भास्कर को पहुंचाई है उससे पहले 4 बार पत्र लिख चुकी है, लेकिन सिर्फ इस आस में उसे पोस्ट नहीं किया कि हो सकता है इस माह चालू हो जाए, लेकिन जब इस दौरान दो बार मुख्यमंत्री कोटा आकर चली गईं और उद्घाटन फिर भी नहीं हुआ तो उसने 5वीं बार पत्र लिखा और जिद करके उसे भास्कर भिजवाया।
आकांक्षा ने बताया कि ‘दूर से चमकता श्रीनाथपुरम स्टेडियम और उसके भीतर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा बैडमिंटन हॉल, देखने में काफी अच्छा लगता है, लेकिन जब बाहर लटका हुआ ताला देखती हूं तो मन बैठक जाता है।
मैं बैडमिंटन अच्छा खेलती हूं और लगातार प्रेक्टिस कर अपने खेल को आगे तक ले जाना चाहती हूं, लेकिन प्रेक्टिस के लिए जगह नहीं है। श्रीनाथपुरम स्टेडियम घर के पास है, वहां जा सकती हूं पर बिना उद्घाटन हुए उसमें हमें खेलने की परमिशन नहीं है। प्लीज इस स्टेडियम को चालू करवा दो।’ मूलरूप से झांसी के निकट छत्रपुर की रहने वाली आकांक्षा अपने भाई-बहनों की कोचिंग की खातिर मां के साथ कोटा आकर रहने लगी है, लेकिन यहां उसकी बैडमिंटन की प्रेक्टिस छूट गई। जिस स्कूल में वो पढ़ती है वहां भी बैडमिंटन कोर्ट नहीं है। घर के पास पार्क में खेलने जाते हैं तो वहां भी आपत्ति करते हैं। घर के बाहर सड़क पर ही कुछ देर खेल लेती हूं। पिछले दिनों जिला स्तर पर खेलने गई थी, लेकिन प्रेक्टिस के अभाव में सफलता नहीं मिल सकी।
ये सुविधाएं हैं इसमें- बैंडमिंटन वुडन कोर्ट, लॉन टेनिस कोर्ट, बास्केटबॉल कोर्ट, वॉलीबॉल कोर्ट, फुटबाल मैदान, आधुनिक जिम, 8 लेन का रेसिंग ट्रैक है।
- 15.85 करोड़ रु. लागत।
- 5.5 हैक्टेयर क्षेत्रफल में बना है।
- 08 माह पहले पूरा हुआ।
दो महीने में केवल बयान बदले, इरादा तो अब भी साफ नहीं
खेल और उद्घाटन दोनों बड़े
खेल और उद्घाटन दोनों ही बड़े हैं। खेलने से किसी ने रोका तो नहीं। वैसे इसका उद्घाटन सीएम को करना है, पहले मैं दिखवाता हूं कि स्टेडियम कंप्लीट हुआ या नहीं। उसे बाद ही कुछ कह पाऊंगा।
अब 19 फरवरी 2016 को कह रहे हैं
मैं निरीक्षण करूंगा, फिर तय करूंगा
स्टेडियम के उद्घाटन संबंध में मुख्यमंत्री से चर्चा हुई थी। लेकिन, मुझे बताया गया कि कुछ काम बाकी है। एक बार मैं इसका निरीक्षण करूंगा। जो थोड़ा काम बाकी था यदि वो पूरा हो गया होगा तो शीघ्र ही उद्घाटन कर इसे शुरू करवा दिया जाएगा।
22 दिसंबर 2015 को कहा था
जल्द करवाएंगे लोकार्पण
पहले मुख्यमंत्री से स्टेडियम का लोकार्पण करवाना चाहते थे, लेकिन कार्यक्रम तय नहीं हो पा रहा है। अब इस बारे में सांसद ओम बिरला से बात करके शीघ्र ही इसका लोकार्पण करवाया जाएगा, ताकि इसका लाभ लोगों को मिल सके।
अब 19 फरवरी 2016 को कह रहे हैं
मंत्री से बात की थी, जल्द शुरू करवाएंगे
स्टेडियम को शुरू करवाने के लिए स्वायत्त शासन मंत्री राजपाल से बात की थी। उन्होंने इस माह के अंत तक आने और उद्घाटन करने की बात कही है। एक बार प्रभारी मंत्री से और बात कर लेंगे ताकि शीघ्र ही इसे शुरू करवाया जाएगा।
भास्कर को लिखी गई चिट्ठी में आकांक्षा उपाध्याय ने कहा है कि मैं आपके समाचार पत्र के माध्यम से इस ओर ध्यान आकर्षित करना चाहती हूं कि श्रीनाथपुरम का स्टेडियम पिछले 8 माह से बनकर तैयार है, लेकिन पब्लिक के लिए खोला नहीं जा रहा है। मेरे परिजन मुझे बैडमिंटन खेलने के लिए दादाबाड़ी व नयापुरा भेजना अफोर्ड नहीं कर सकते हैं। बैडमिंटन का प्लेयर बनना मेरा एकमात्र सपना है। आशा करती हूं कि आप इस ओर ध्यान देंगे।
आकांक्षा ही नहीं उसकी सहेलियां भी हैं दुखी
आकांक्षा ने बताया कि वो अकेली नहीं है। इस क्षेत्र में उसकी दो और सहेलियां भी हैं जो बेडमिंटन खेलना चाहती हैं, लेकिन दूर जाने में उन्हें भी परेशानी है। आकांक्षा ने जो चिट्ठी भास्कर को पहुंचाई है उससे पहले 4 बार पत्र लिख चुकी है, लेकिन सिर्फ इस आस में उसे पोस्ट नहीं किया कि हो सकता है इस माह चालू हो जाए, लेकिन जब इस दौरान दो बार मुख्यमंत्री कोटा आकर चली गईं और उद्घाटन फिर भी नहीं हुआ तो उसने 5वीं बार पत्र लिखा और जिद करके उसे भास्कर भिजवाया।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai