एक दूसरे के प्रखर विरोधी रहे कांग्रेस के दो पूर्व मंत्री शांति धारीवाल तथा भरतसिंह शुक्रवार को एक मंच पर थे। मौका था कांग्रेस कार्यालय में देहात अध्यक्ष सरोज मीणा के कार्यभार ग्रहण करने का। इस दौरान दोनों ने एक दूसरे की खुलकर तारीफ ही नहीं की बल्कि माला भी पहनाई और गले भी मिले।
यह नौटंकी नहीं
भरतसिंह ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि लम्बे अर्से बाद धारीवाल और हम एक मंच पर बैठे हैं। यह कोई नौटंकी नहीं है। मेरे पिता 97 वर्षीय जुझार सिंह ने धारीवाल से अलग से मुलाकात होने के बाद कहा है कि दोनों को मिल कर चलने में ही कांग्रेस का हित है। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने भरतसिंह के नारे लगाए तो उन्होंने कहा कि अलग-अलग नेताओं के नारे लगाने से कुछ नहीं होगा।
स्वभाव बदल नहीं सकता
कांग्रेस को जिंदा रखना है तो अलग अलग नारे लगाना बंद करो। सिंह ने स्वीकार किया कि मेरा स्वभाव कड़वा है वह बदल नहीं सकता। भरतसिंह को माला पहनाते हुए धारीवाल ने कहा कि 7 वर्ष बाद यह समय आया कि मुझे भरत सिंह का नाम लेने का अवसर मिला
यह नौटंकी नहीं
भरतसिंह ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि लम्बे अर्से बाद धारीवाल और हम एक मंच पर बैठे हैं। यह कोई नौटंकी नहीं है। मेरे पिता 97 वर्षीय जुझार सिंह ने धारीवाल से अलग से मुलाकात होने के बाद कहा है कि दोनों को मिल कर चलने में ही कांग्रेस का हित है। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने भरतसिंह के नारे लगाए तो उन्होंने कहा कि अलग-अलग नेताओं के नारे लगाने से कुछ नहीं होगा।
स्वभाव बदल नहीं सकता
कांग्रेस को जिंदा रखना है तो अलग अलग नारे लगाना बंद करो। सिंह ने स्वीकार किया कि मेरा स्वभाव कड़वा है वह बदल नहीं सकता। भरतसिंह को माला पहनाते हुए धारीवाल ने कहा कि 7 वर्ष बाद यह समय आया कि मुझे भरत सिंह का नाम लेने का अवसर मिला
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Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai