शहर के ऐतिहासिक स्थल गैपरनाथ संरक्षण को लेकर पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ने अपने हाथ खींच लिए हैं। विभाग ने इसे अनप्रोटेक्ट (असंरक्षित) के लिए मुख्यालय को प्रपोजल भिजवा दिया हैं। नोटिफिकेशन जारी होने के बाद नियमानुसार विभाग का यहां संरक्षण नहीं रहेगा।
विकास कार्य नहीं हो पाए
स्थानीय अधिकारियों का तर्क है कि यहां पुरा सामग्री या पुरामहत्व की धरोहर नहीं होने से प्रस्ताव भिजवाए हैं। जो विभाग के हित में हैं। वहीं, दूसरी तरफ मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में हैं, लेकिन पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग से संरक्षित होने से कोई विकास कार्य नहीं हो पाए हैं।
उपेक्षा का शिकार हो जाएगा
इसका कारण यह है कि संरक्षित होने से फॉरेस्ट इसके मूल स्वरूप से लेकर अन्य किसी भी तरह का बदलाव नहीं कर सकता है। उल्लेखनीय है कि यदि इसे असंरक्षित कर दिया जाएगा तो शहरी सीमा में चंबल की वादियों में बना यह पुरा स्थल देखरेख के अभाव में उपेक्षा का शिकार हो जाएगा।
संरक्षित किया गया था
16 सितंबर 1968 को इसे संरक्षित का नोटिफिकेशन जारी किया है। उसी समय में प्रदेश के पुरा स्मारक रामगढ़ देवरा, बांसथूनी, शिव मंदिर भंडदेवरा, नाहरगढ़ का किला, शाहबाद मस्जिद, बादल महल, शाहबाद किला, केलवाड़ा सहित अन्य स्थलों को इसी के साथ संरक्षित किया था।
इतिहास में प्रमाण
इतिहासकार डॉ.जगत नारायण बताते है कि संवत 1636 के प्रमाण मिले हैं। इसमें... संवत 1636 आदितवार बाबा जी श्री दामोदरपुरी गैपरण्यानी धर्मशाला खुदाई अमलकोट महाराव कंवर श्री भोज जी राव कू बधाई... शिलालेख में उत्कीर्ण है। बूंदी के राजा कंवर भोज के समय धर्मशाला बनी।
नेचुरल प्लेस
वन्यजीवप्रेमी डॉ.कृष्णेंद्र सिंह नामा बताते है कि चंबल की कराइयों में यह वल्चर की कॉलोनी है। चंबल के इस एरिया में दुर्लभ वन्यजीवों का बसेरा है।
रेंजर्स ने क्या कहा
बोरावास मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के रेंजर संजय शर्मा का कहना है कि यह टाइगर रिजर्व में भी हैं, लेकिन पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षण की जिम्मेदारी होने से ईको-टूरिज्म डवलप नहीं किया हैं। हमारे अधीन होने पर नियमानुसार विकास कार्य करवा जा सकेंगे।
विकास कार्य नहीं हो पाए
स्थानीय अधिकारियों का तर्क है कि यहां पुरा सामग्री या पुरामहत्व की धरोहर नहीं होने से प्रस्ताव भिजवाए हैं। जो विभाग के हित में हैं। वहीं, दूसरी तरफ मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में हैं, लेकिन पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग से संरक्षित होने से कोई विकास कार्य नहीं हो पाए हैं।
उपेक्षा का शिकार हो जाएगा
इसका कारण यह है कि संरक्षित होने से फॉरेस्ट इसके मूल स्वरूप से लेकर अन्य किसी भी तरह का बदलाव नहीं कर सकता है। उल्लेखनीय है कि यदि इसे असंरक्षित कर दिया जाएगा तो शहरी सीमा में चंबल की वादियों में बना यह पुरा स्थल देखरेख के अभाव में उपेक्षा का शिकार हो जाएगा।
संरक्षित किया गया था
16 सितंबर 1968 को इसे संरक्षित का नोटिफिकेशन जारी किया है। उसी समय में प्रदेश के पुरा स्मारक रामगढ़ देवरा, बांसथूनी, शिव मंदिर भंडदेवरा, नाहरगढ़ का किला, शाहबाद मस्जिद, बादल महल, शाहबाद किला, केलवाड़ा सहित अन्य स्थलों को इसी के साथ संरक्षित किया था।
इतिहास में प्रमाण
इतिहासकार डॉ.जगत नारायण बताते है कि संवत 1636 के प्रमाण मिले हैं। इसमें... संवत 1636 आदितवार बाबा जी श्री दामोदरपुरी गैपरण्यानी धर्मशाला खुदाई अमलकोट महाराव कंवर श्री भोज जी राव कू बधाई... शिलालेख में उत्कीर्ण है। बूंदी के राजा कंवर भोज के समय धर्मशाला बनी।
नेचुरल प्लेस
वन्यजीवप्रेमी डॉ.कृष्णेंद्र सिंह नामा बताते है कि चंबल की कराइयों में यह वल्चर की कॉलोनी है। चंबल के इस एरिया में दुर्लभ वन्यजीवों का बसेरा है।
रेंजर्स ने क्या कहा
बोरावास मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के रेंजर संजय शर्मा का कहना है कि यह टाइगर रिजर्व में भी हैं, लेकिन पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षण की जिम्मेदारी होने से ईको-टूरिज्म डवलप नहीं किया हैं। हमारे अधीन होने पर नियमानुसार विकास कार्य करवा जा सकेंगे।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai