शहर के प्रमुख मंदिरों में अब चंदन के पेड़ लगाए जाएंगे। शिवपुरी धाम के नागा बाबा सनातनपुरी इसकी पहल करेंगे। वो इनकी पौध तैयार कर रहे हैं। जिसमें लाल चंदन के 108 पौधे तैयार होंगे। बाबा इनकी हर दिन देखभाल कर रहे हैं। पौधों को गुलाब की टहनियों का सहारा भी दिया जा रहा है।
पांच महीने में तैयार होंगे पौधे
कोटा के पूर्व महाराव ने दक्षिण भारत से इस किस्म के पौधे लाकर यहां कोटा में लगाए थे। लेकिन, चोरी होने से इनकी किस्म में संकट हो गया है। ऐसे में इस किस्म को बचाने और मंदिरों में शुभ होने से यह प्रयास कर रहे हैं। पांच महीने में ये पौधे तैयार होंगे। बाद में इन्हें वहां लगवाया जाएगा। बाबा ने बताया कि लाल चंदन के पेड़ों की चोरी के लिए कठोर कानून बनना चाहिए। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों यहां से 27 लाल चंदन के पेड़ चोरी हो गए हैं। लेकिन चोरी के आरोपी अभी तक पकड़े नहीं जा सके हैं।
अनुकूल है कोटा का वातावरण
बाबा ने बताया कि दक्षिण भारत में लाल चंदन का पेड़ बनने में 25 साल का समय लगता है। जबकि कोटा में ये 10 साल में हो जाता है। उन्होंने बताया कि इसके लिए यहां की मिट्टी उपयुक्त है। साथ ही वातावरण भी इसके अनुसार मिल जाता है। इसमें छाया की विशेष सावधानी रखनी होती है।
पक्षियों के लिए उपयोगी
लाल चंदन के पेड़ से बने फल को खाने के लिए स्थानीय के अलावा प्रवासी पक्षी भी आते हैं। उन्होंने बताया कि यहां से कई लोग बीज लेकर गए हैं। जो अभी कामखेड़ा, तीन धार सहित अन्य स्थानों पर उगे हुए हैं।
पांच महीने में तैयार होंगे पौधे
कोटा के पूर्व महाराव ने दक्षिण भारत से इस किस्म के पौधे लाकर यहां कोटा में लगाए थे। लेकिन, चोरी होने से इनकी किस्म में संकट हो गया है। ऐसे में इस किस्म को बचाने और मंदिरों में शुभ होने से यह प्रयास कर रहे हैं। पांच महीने में ये पौधे तैयार होंगे। बाद में इन्हें वहां लगवाया जाएगा। बाबा ने बताया कि लाल चंदन के पेड़ों की चोरी के लिए कठोर कानून बनना चाहिए। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों यहां से 27 लाल चंदन के पेड़ चोरी हो गए हैं। लेकिन चोरी के आरोपी अभी तक पकड़े नहीं जा सके हैं।
अनुकूल है कोटा का वातावरण
बाबा ने बताया कि दक्षिण भारत में लाल चंदन का पेड़ बनने में 25 साल का समय लगता है। जबकि कोटा में ये 10 साल में हो जाता है। उन्होंने बताया कि इसके लिए यहां की मिट्टी उपयुक्त है। साथ ही वातावरण भी इसके अनुसार मिल जाता है। इसमें छाया की विशेष सावधानी रखनी होती है।
पक्षियों के लिए उपयोगी
लाल चंदन के पेड़ से बने फल को खाने के लिए स्थानीय के अलावा प्रवासी पक्षी भी आते हैं। उन्होंने बताया कि यहां से कई लोग बीज लेकर गए हैं। जो अभी कामखेड़ा, तीन धार सहित अन्य स्थानों पर उगे हुए हैं।
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Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai