मधुमेह रोगी अपने चेहरे की तरह पैरों की देखभाल करें। हर सात मधुमेह रोगियों में एक को डायबिटिक फुट की समस्या होती है। ऐसे मरीजों को गैंगरीन होने के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है। कभी-कभी तो पैर काटने तक की नौबत आ जाती है। इसका बचाव मात्र ब्लड शुगर पर नियंत्रण रखना ही है।
डॉक्टर सलूजा ने और क्या कहा
ये बातें मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. मनोज सलूजा ने कही। वे मंगलवार को मेडिकल कॉलेज ऑडिटोरियम में मेडिकल स्टूडेंट्स व नर्सिंग स्टूडेंट्स के लिए आयोजित सीएमई (सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम) को संबोधित कर रहे थे। डायबिटिक फुट की देखभाल और उपचार विषय पर बोलते हुए डॉ. सलूजा ने कहा कि मधुमेह रोगी को पैर में होने वाली छोटी सी चोट को भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। मामूली चोट का मधुमेह रोगी को अहसास भी नहीं होता।
रोजाना 30 मिनट तेज चाल में चलना जरूरी
इसलिए मधुमेह रोगी को नियमित जांच करनी चाहिए। मधुमेह रोगियों के लिए अब हॉफ शू व फुट कॉस्ट आने लगे हैं। जिससे पैरों में होने वाले जख्मों से बचाव होता है। मधुमेह रोगियों के आहार व व्यायाम विषय पर बोलते हुए डॉ. अब्दुल वाहिद ने कहा कि जीवनशैली में परिवर्तन कर मधुमेह रोग से बचा जा सकता है। ब्रेकफास्ट, लंच, डिनर में कैलोरी की मात्रा समान रखनी चाहिए। तेल व घी का इस्तेमाल कम करना चाहिए। इस रोग से बचाव के लिए रोजाना 30 मिनट तेज चाल में चलना चाहिए।
खानपान में बदलाव भी मधुमेह का कारण
मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. गिरीश वर्मा ने कहा कि लोग अब फल-सब्जियों की जगह पिज्जा, बर्गर, कोल्ड ड्रिंक्स लेने लगे हैं। व्यायाम नहीं करते। लोगों में मोटापा बढ़ता जा रहा है। इसके कारण भी मधुमेह रोग बढ़ा है। बच्चों में भी टाइप टू डायबिटीज होने लगी है। मधुमेह रोग का कारण अनुवांशिक भी होता है।
हिमांशी अव्वल रहीं
मधुमेह जागरूकता के तहत पोस्टर व नारा लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई। पोस्टर प्रतियोगिता में हिमांशी व अप्शा नाज ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। उन्हें 1100 रुपए नकद पुरस्कार के रूप में दिए गए। इसी प्रकार दूसरे स्थान पर रहीं चंचल सुवालका को 750 रुपए और तीसरे स्थान पर रहे सूर्यप्रकाश को 500 रुपए का नकद पुरस्कार दिया गया।
डॉक्टर सलूजा ने और क्या कहा
ये बातें मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. मनोज सलूजा ने कही। वे मंगलवार को मेडिकल कॉलेज ऑडिटोरियम में मेडिकल स्टूडेंट्स व नर्सिंग स्टूडेंट्स के लिए आयोजित सीएमई (सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम) को संबोधित कर रहे थे। डायबिटिक फुट की देखभाल और उपचार विषय पर बोलते हुए डॉ. सलूजा ने कहा कि मधुमेह रोगी को पैर में होने वाली छोटी सी चोट को भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। मामूली चोट का मधुमेह रोगी को अहसास भी नहीं होता।
रोजाना 30 मिनट तेज चाल में चलना जरूरी
इसलिए मधुमेह रोगी को नियमित जांच करनी चाहिए। मधुमेह रोगियों के लिए अब हॉफ शू व फुट कॉस्ट आने लगे हैं। जिससे पैरों में होने वाले जख्मों से बचाव होता है। मधुमेह रोगियों के आहार व व्यायाम विषय पर बोलते हुए डॉ. अब्दुल वाहिद ने कहा कि जीवनशैली में परिवर्तन कर मधुमेह रोग से बचा जा सकता है। ब्रेकफास्ट, लंच, डिनर में कैलोरी की मात्रा समान रखनी चाहिए। तेल व घी का इस्तेमाल कम करना चाहिए। इस रोग से बचाव के लिए रोजाना 30 मिनट तेज चाल में चलना चाहिए।
खानपान में बदलाव भी मधुमेह का कारण
मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. गिरीश वर्मा ने कहा कि लोग अब फल-सब्जियों की जगह पिज्जा, बर्गर, कोल्ड ड्रिंक्स लेने लगे हैं। व्यायाम नहीं करते। लोगों में मोटापा बढ़ता जा रहा है। इसके कारण भी मधुमेह रोग बढ़ा है। बच्चों में भी टाइप टू डायबिटीज होने लगी है। मधुमेह रोग का कारण अनुवांशिक भी होता है।
हिमांशी अव्वल रहीं
मधुमेह जागरूकता के तहत पोस्टर व नारा लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई। पोस्टर प्रतियोगिता में हिमांशी व अप्शा नाज ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। उन्हें 1100 रुपए नकद पुरस्कार के रूप में दिए गए। इसी प्रकार दूसरे स्थान पर रहीं चंचल सुवालका को 750 रुपए और तीसरे स्थान पर रहे सूर्यप्रकाश को 500 रुपए का नकद पुरस्कार दिया गया।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai