यूनिसेफ की कार्यशाला में बाल श्रम पर चर्चा, समस्या नहीं अपराध है बाल श्रम

यूनिसेफ की कार्यशाला में बाल श्रम पर चर्चा, समस्या नहीं अपराध है बाल श्रम

यूनिसेफ की कार्यशाला में बाल श्रम पर चर्चा, समस्या नहीं अपराध है बाल श्रम

बाल श्रम पर सोमवार शाम उम्मेद भवन पैलेस होटल में अरावली संस्था व यूनिसेफ की कार्यशाला हुई। यूनिसेफ के नेशनल डेलीगेशन की मौजूदगी में हुई इस कार्यशाला में फोकस हाड़ौती संभाग के डाबी खनन क्षेत्र में हो रहे बच्चों के शोषण पर रहा। कानूनविद व शिक्षाविद् समेत देशभर में बाल श्रम व अन्य क्षेत्रों में काम कर रहे एनजीओ के पदाधिकारी भी इसमें शामिल हुए।
बच्चों से छीन रहा बचपन
वक्ताओं ने साफ कहा कि बाल श्रम को हमारा समाज आज भी समस्या के रूप में लेता है, जबकि इसे अपराध के रूप में देखा जाना चाहिए। यह एक अपराध है, जो बच्चों से उनका बचपन छीन रहा है। जिस दिन समाज के नजरिए बदलाव आ जाएगा, स्थिति सुधरेगी। पहली बार हुए इस तरह के आयोजन में डाबी क्षेत्र के कुछ बच्चों व उनके अभिभावकों को भी बुलाया गया था, जो क्षेत्र में बदलाव के अगुवा बने हैं।
कौन-कौन रहे मौजूद
बैठक में दिल्ली, जयपुर, अजमेर, झालावाड़, भीलवाड़ा, जोधपुर, करौली, असम समेत प्रदेशभर में अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यरत एनजीओ के पदाधिकारी व कॉर्पोरेट्स थे। वहीं यूनिसेफ के भारत में डिप्टी रिप्रजेंटेटिव ऑपरेशन जैम्स गिताऊ, राजस्थान के चीफ सैम्यूअल, रिसोर्स मोबिलिटी हैड क्रिस्टीना, सीएसआर हैड रुचिरा, चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर संजय ने भाग लिया। गौरतलब है कि सितंबर, 2015 में यूनिसेफ ने बूंदी जिले के डाबी के खान श्रमिकों व बाल श्रम पर एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें क्षेत्र की भयावह स्थिति बताई गई थी।
इन्होंने क्या कहा
- शिक्षाविद् रवि ने कहा है कि बच्चे खुद की जिम्मेदारी नहीं समझते। उनका जिम्मा पूरे समाज का है। देश में बच्चों के लिए एक बड़ा आंदोलन खड़ा करना हमारे लिए चुनौती है।
- यूनिसेफ के सीएसआर हैड रुचिरा ने कहा है कि बाल श्रम मूल व्यवसाय में नहीं होता, बल्कि सब कॉन्ट्रेक्ट में हो रहा है। हम बियोंड द लॉ काम कर रहे हैं, इसी पर यूनिसेफ का फ्रेमवर्क है।
ऐसे होगा बेहतर काम
यूनिसेफ के स्टेट चीफ सैम्यूअल ने कहा है कि राजस्थान में स्टोन इंडस्ट्री बहुत बड़ा उद्योग है। गरीब परिवार होते हैं, स्किल्ड नहीं होते, अनपढ़ होते हैं, अनहेल्दी माहौल में काम करते हैं। ऐसे में उनकी दूसरी पीढ़ी फिर से इसी काम में लग जाती है और गरीबी बरकरार रहती है। हमने जो पहले स्टडी करवाई थी, वह स्पेशिफिक नहीं थी और उसमें सभी विषयों का समावेश था। इसलिए हमने अभी वह रिपोर्ट सरकार को भी नहीं दी। हम चाहते हैं, पहले खुद काम करें, फिर सरकार को कहें। हम इसमें पंचायतीराज जनप्रतिनिधियों की मदद चाहते हैं। सरकार इसे लेकर संवेदनशील है। हम कांक्रीट एक्शन प्लान बनाने जा रहे हैं, फिर सरकार को देंगे। आज की वर्कशॉप उसी कड़ी का हिस्सा है, जिसमें सभी वर्गों को बुलाया है। माइंस ऑनर्स, उद्यमी, एनजीओ, सरकारी प्रतिनिधि भी इसमें हैं।
पहले मुद्दे की पहचान, फिर उस पर काम
यूनिसेफ के डिप्टी रिप्रजेंटेटिव (ऑपरेशन) जैम्स गिताऊ ने कहा है कि बाल श्रम को लेकर मौजूदा सरकार का फोकस सही दिशा में है। इसी की वजह से हम राजस्थान में काम कर रहे हैं। हम एक मुद्दे की पहचान करते हैं, फिर उस पर काम करते हैं। इसमें सभी हित धारकों को साथ ले रहे हैं। बच्चों के स्वास्थ्य व पोषण पर हमारी खास नजर है। यूनिसेफ इसे एक बच्चे के रूप में ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार के परिप्रेक्ष्य में देखता है। सभी हित धारकों के साथ फ्रेमवर्क किया है। आज इसी साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए यह डायलॉग रखा गया है। दूसरे प्रदेशों के हमारे पास आंकड़े या अध्ययन नहीं है, लेकिन मैं मानता हूं कि खनन क्षेत्र में यह समस्या पूरे देश में होगी।

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2 Comments

  1. Visitor Photo
    By : Amritlal

    Job

  2. Visitor Photo
    By : Devesh

    Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai

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